मंगलौर में शाह विलायत की दरगाह से मिलता है रूहानी सकूंन, तीन दिन तक चले उर्स को मनाया गया सादगी के साथ-प्रो तनवीर चिश्ती

आरिफ नियाज़ी

रूडकी के मंगलौर में मशहूर सूफी संत हज़रत शाह विलायत का उर्स कोरोना काल में बड़ी सादगी के साथ बनाया गया।इस बार कोरोना माहमारी को देखते हुए दरगाह पर होने वाली कव्वाली, मुशायरा, एवं सर्वधर्म सम्मेलन को स्थगित कर दिया गया था। इस बार कुरान खानी शजरा खानी, खतम शरीफ और लंगर आदि की रस्में ही पूरी की गई। इस मौके पर प्रोफेसर तनवीर चिश्ती ने बड़ी बेबाकी के साथ कहा कि हिंदुस्तान सूफी संतों की सरजमीं रही है सूफी मत ने हमेशा देश ही नहीं पूरी दुनिया मे दिलों को जोड़ने का काम किया यही वजह है कि सूफी संतों के संदेश के बाद सभी धर्मों के लोग आज भी दुनिया में भाईचारे और प्यार मोहब्बत के साथ रहते हैं।

हमेशा सूफी संतों ने एकता भाईचारे का संदेश दिया तनवीर चिश्ती ने कहा कि अजमेर शरीफ खुआजा अजमेरी ,दिल्ली में हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया , बरेली शरीफ हज़रत नियाज़ बे नियाज़,कलियर शरीफ में साबिर साहब और मंगलौर में शाह विलायत शाह ने हमेशा ही प्यार मोहब्बत और भाईचारे का संदेश दिया जिसे आज पूरी दुनिया के लोग मानते है।तनवीर चिश्ती ने बताया कि तीन दिन तक चले उर्स में इस बार कोरोना के खात्मे और लोगों में खुशहाली की विशेष दुआएं की गई हैं । खास बात ये रही कि इस बार लेखक और शिक्षाविद लक्ष्मण दास महाराज ने सूफी मत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदुस्तान में खुआजा अजमेरी ने भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देते हुए इस्लाम फैलाया। उनके सामने बहुत बड़ी बड़ी मुश्किलें चुनोतियाँ भी आईं जिनका उन्होंने डटकर सामना किया कभी हार नहीं मानी आज भी उनकी दरगाह पर पहुंचकर रूहानी सकूंन मिलता है और लोगों की मन्नते मुरादें पूरी होती हैं।

आज पूरी दुनिया मे खुआजा मोइनुद्दीन चिश्ती का डंका बजता है और हमेशा बजता रहेगा। जितने भी औलिया और वली हुए उन्होंने हमेशा आपसी भाईचारे तालमेल और अहिंसा का संदेश दिया।इस मौके पर कलियर से इमरान मियां,इरफान साबरी,ज़हूर साबरी अंसारी,मौलाना शमीम,हाफ़िज़ मौलाना सज्जाद ,इंजीनियर मज़ाहिर साबरी,हाफ़िज़ अब्दुल्लाह,कारी सलीम,हाफ़िज़ अब्दुलसमद,हाफ़िज़ फुरकान,सूफी सैयद अकबर हुसैन,सूफी खालिद फारूकी,सूफी कुर्बान मलिक, राव कलीम साबरी,डॉ शफीउज़्ज़मा,सूफी शाहबाज,सूफी तस्लीम,सूफी तहमूर उस्मानी,सैयद जीशान,और सूफी अब्दुल बासिद आदि शामिल रहे।

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